Tuesday, 2 June 2020

न्यूटन के गति के नियम newton’s law of motion in hindi क्या है -All tech

न्यूटन के गति के नियम मे तीन भौतिक नियम हैं जो चिरसम्मत यांत्रिकी के आधार हैं। ये नियम किसी वस्तु पर लगने वाले बल और उससे उत्पन्न उस वस्तु की गति के बीच सम्बन्ध बताते हैं। न्यूटन के गति के तीनों नियम, पारम्परिक रूप से निम्नलिखित हैं-


न्यूटन की गति का पहला नियम (newton's first law)


पहला नियम इस प्रकार है:

“कोई भी वस्तु स्थिर वेग के साथ तब तक विराम अवस्था में रहती है या गति की अवस्था में तब तक रहती है, जब तक किसी बाह्य बल के द्वारा उस वस्तु की गति में परिवर्तन न किया जाये।”

इसका मतलब यह है की वस्तुएं अपने आप से न तो अपनी गति शुरू कर सकती हैं, न रोक सकती हैं और न ही दिशा बदल सकती हैं। इस प्रकार के बदलाव के लिए बाहरी बलों (force) की आवश्यकता होती है। उदारणस्वरूप जब आप पेड़ की डाली को हिलाते हो तो उसके पत्ते निचे गिरते हैं, कोई वाहन जब अचानक से चल पड़ता है, तो यात्री पीछे की ओर झुक जाते हैं इत्यादि।


न्‍यूटन का दूसरा नियम (Newton’s Second law)

वस्‍तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस पर आरोपित बल के अनुक्रमानुपाती होती है तथा संवेग परिवर्तन आरोपित बल की दिशा में होता है

या

किसी वस्‍तु पर आरोपित बल, उस वस्‍तु के द्रव्‍यमान तथा बल की दिशा में उत्‍पन्‍न त्‍वरण के गुणनफल के बराबर होता है अगर किसी m द्रव्‍यमान वाली वस्‍तु पर F बल आरोपित करने से उसमें बल की दिशा में a त्‍वरण उत्‍पन्‍न होता है तो दूसरे नियम के अनुसार F = ma

उदाहरण – 

समान वेग से आती हुई क्रिकेट गेंद एवं टेनिस गेंद में से टेनिस गेंद को कैच करना आसान होता हैकराटे खिलाडी द्वारा हाथ के प्रहार से ईटोंं की पटटी तोडनाअधिक गहराई तक कील को गाडने के लिए भारी हथौडे का उपयोग किया जाता है


न्यूटन का गति का तीसरा नियम (Newton's Thard law)

जब कोई वस्तु किसी अन्य वस्तु पर बल आरोपित करती है तो जितना बल वस्तु अन्य वस्तु पर बल आरोपित करेगी उतना ही बल , विपरीत दिशा में अन्य वस्तु द्वारा उस वस्तु पर कार्य करता है।
नियम : ” हर क्रिया की समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। ”
इसे दूसरे शब्दों में ऐसे भी कह सकते है की बल हमेशा युगल (जोड़े) के रूप में पाया जाता है।
उदाहरण : जैसे जब एक रोकेट को आसमान में छोड़ा जाता है तो राकेट पीछे जमीन पर बल लगाती है या क्रिया करती है जिससे जमीन राकेट पर विपरीत बल लगाती है या प्रतिक्रिया करती है जिससे राकेट ऊपर की तरफ उठता है ऊपर की तरफ उठने के लिए जमीन द्वारा इस पर प्रतिक्रिया के रूप में बल लगाया जाता हैं |


गति के तृतीय नियम के महत्वपूर्ण बिन्दु निम्नलिखित है –

तृतीय नियम में क्रिया एवं प्रतिक्रिया का अर्थ केवल बल से है। एक सरल और स्पष्ट रूप से तृतीय नियम बताता है कि बल हमेशा जोड़े के रूप में उत्पन्न होते है। वस्तु A पर वस्तु B के द्वारा आरोपित बल हमेशा वस्तु B पर वस्तु A के द्वारा आरोपित बल के बराबर एवं विपरीत होता है।तृतीय नियम में क्रिया और प्रतिक्रिया के बारे में यह गलत धारणा हो सकती है कि क्रिया , प्रतिक्रिया से पहले होती है अर्थात क्रिया कारण है और प्रतिक्रिया प्रभाव है। तृतीय नियम में इस प्रकार का कारण प्रभाव सम्बन्ध नहीं होता है। B के द्वारा A पर बल और B पर A के द्वारा बल एक ही समय पर कार्य करते है। इनमे से किसी भी एक को क्रिया और दुसरे को प्रतिक्रिया कह सकते है।क्रिया और प्रतिक्रिया बल भिन्न भिन्न वस्तुओं पर लगते है , न कि समान वस्तु पर। इसलिए यदि हम किसी भी एक वस्तु (A या B ) की गति को देखे तो दोनों में से केवल एक बल सम्बन्धित होता है। यह गलत है कि दोनों बलों को जोड़ने और परिणामी बल शून्य प्राप्त होने का दावा करे। इस प्रकार दो वस्तुओं के सम्पूर्ण निकाय की बात करे , FAB (B द्वारा A पर बल) और FBA ( A द्वारा B पर बल) निकाय (A + B) के आंतरिक बल है। इनको जोड़ने पर शून्य बल मिलता है। किसी वस्तु या कणों के निकाय के अन्दर आंतरिक बल जोड़े के रूप में निरस्त हो जाते है। यह एक मुख्य तथ्य है कि द्वितीय नियम वस्तु के लिए अथवा कणों के एक निकाय के लिए लागू होता है|

क्रिया और प्रतिक्रिया बल परिमाण में बराबर और दिशा में विपरीत होते है। लेकिन अलग अलग वस्तुओं पर कार्य करते है इसलिए क्रिया और प्रतिक्रिया एक दुसरे को कभी निरस्त नहीं करती है।

व्यावहारिक उदाहरण :

बंदूक से गोली छूटने पर पीछे की ओर गति करती है : बंदूक से गोली छोड़ते समय बंदूक गोली पर आगे की ओर बल (क्रिया) लगाती है। न्यूटन के गति विषयक तृतीय नियम के अनुसार गोली बंदूक पर बराबर प्रतिक्रिया विपरीत दिशा में पीछे की ओर लगाती है , जिस कारण बंदूक प्रतिक्षिप्त होकर पीछे की तरफ गति करती है

सबसे पहले न्यूटन ने इन्हे अपने ग्रन्थ फिलासफी नेचुरालिस प्रिंसिपिआ मैथेमेटिका में संकलित किया था। न्यूटन ने अनेक स्थानों पर भौतिक वस्तुओं की गति से सम्बन्धित समस्याओं की व्याख्या में इनका प्रयोग किया था। अपने ग्रन्थ के तृतीय भाग में न्यूटन ने दर्शाया कि गति के ये तीनों नियम और उनके सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम सम्मिलित रूप से केप्लर के आकाशीय पिण्डों की गति से सम्बन्धित नियम की व्याख्या करने में समर्थ हैं।


गुरूत्वकर्षण क्या है - पुरी जानकारी--
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